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Jungle train baal katha aur kavitao ki Pustika

““कामरूप के नंदन कानन में आज पहली बार ट्रेन चलने वाली है; मनुष्यों के लिए नहीं, इस जंगल के पशु-पक्षियों के लिए। जंगल में भरपूर आनन्द और उत्सव का माहौल है।“
‘जंगल ट्रेन’ पुस्तिका के दो भाग हैं- भाग – एक में ‘जंगल ट्रेन’ समेत अन्य बारह कहानियाँ, एवं भाग – दो में ‘सूरज जब ढल जाता है’ समेत अन्य उनतीस कविताएँ दी गई हैं। ये कहानियाँ एवं कविताएँ बच्चों की सामान्य क्रिया-कलापों, जैसे कि उनकी पढ़ाई-लिखाई, खेल-कूद, एवं हास्य-विनोद से जुड़ी हैं। अतः ये उनके बाल-मन से मेल खाती हैं, और रोचक हैं।
डॉ राजेश वर्मा पेशे से इतिहास के प्राध्यापक हैं। अरुणाचल प्रदेश में अपने तीन दशकों के कार्यकाल में इन्होंने इतिहास एवं साहित्य से सम्बन्धित एक दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखी हैं जिनमें प्रमुख हैं – History of North East India; Idea of Bharat; History of India 1757-1857; History of Ancient India; उत्तर-पूर्व भारत का इतिहास; आइडिया ऑफ भारत (हिंदी में); शिमला की डायरी; बीसवीं गाँठ; स्वर्ण-काली; मामा; जब दुनिया हिल उठी।”

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SKU: 9789355456731 Category:

““कामरूप के नंदन कानन में आज पहली बार ट्रेन चलने वाली है; मनुष्यों के लिए नहीं, इस जंगल के पशु-पक्षियों के लिए। जंगल में भरपूर आनन्द और उत्सव का माहौल है।“
‘जंगल ट्रेन’ पुस्तिका के दो भाग हैं- भाग – एक में ‘जंगल ट्रेन’ समेत अन्य बारह कहानियाँ, एवं भाग – दो में ‘सूरज जब ढल जाता है’ समेत अन्य उनतीस कविताएँ दी गई हैं। ये कहानियाँ एवं कविताएँ बच्चों की सामान्य क्रिया-कलापों, जैसे कि उनकी पढ़ाई-लिखाई, खेल-कूद, एवं हास्य-विनोद से जुड़ी हैं। अतः ये उनके बाल-मन से मेल खाती हैं, और रोचक हैं।
डॉ राजेश वर्मा पेशे से इतिहास के प्राध्यापक हैं। अरुणाचल प्रदेश में अपने तीन दशकों के कार्यकाल में इन्होंने इतिहास एवं साहित्य से सम्बन्धित एक दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखी हैं जिनमें प्रमुख हैं – History of North East India; Idea of Bharat; History of India 1757-1857; History of Ancient India; उत्तर-पूर्व भारत का इतिहास; आइडिया ऑफ भारत (हिंदी में); शिमला की डायरी; बीसवीं गाँठ; स्वर्ण-काली; मामा; जब दुनिया हिल उठी।”