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Ye meri Sanskriti jo Hai or Anya Vividh Vishyake Alekh

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आठ सौ वर्षों से विदेशियों व विदेशी इतिहासकारों ने पूर्वाग्रहवश हमारे देश के साथ ही हमारे इतिहास व संस्कृति को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया, भ्रष्ट किया एवं अपसंस्कृतियुत मिलावट से भरपूर किया है | हमें व हमारी वर्तमान पीढी को यह ज्ञात ही नहीं कि भारत क्या था ? मुस्लिम व योरोपीय यहाँ क्यों व कैसे आये ? हमारी सांस्कृतिक विरासत व ऐतिहासिक थाती क्या है | हम क्या थे व आज क्यों ऐसे हैं|  किसी देश की वास्तविक संस्कृति, इतिहास, भौगोलिक तथ्य, देश स्थित संरचनाएं उनके तंत्र आदि के ज्ञान, अर्थात अपने देश के सम्पूर्ण ज्ञान का ज्ञान प्रत्येक पीढी को आवश्यक होता है | तब ही प्रजा सच्चे मन से देश की प्रगति में हाथ बटाने योग्य हो सकती है अन्यथा हमें क्या, की भावना यथास्थिति एवं निरंतर विनाश की संभावना उत्पन्न करती है |

अपने शास्त्र, सांस्कृतिक इतिहास, भूगोल व विशिष्ट विषयों, विभिन्न कालखण्डों, भुला दिए गए घटना-क्रमों, वैज्ञानिक विकास व उन्नति के तत्वों  एवं विकृत किये गए तथ्यों, विवरणों  पर भारतीय दृष्टि प्रस्तुत करने के उद्देश्य से, ताकि अपने देश राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर व इतिहास का ज्ञान वर्तमान पीढी को होसके, मैंने अपने शास्त्रीय, पौराणिक व पुरा आख्यानों आदि को हिन्दी में आलेखों द्वारा प्रस्तुत करने का विचार किया | इसी का प्रतिफल प्रस्तुत कृति है |

 

 

Weight 0.300 kg
Dimensions 22 × 15 × 2 cm
Author

Dr. Shyam Gupta

Publisher

Namya Press

Series

Paperback

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