Biography

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Amresh Parasian

जिंदगीसोच बदले या न बदले ..

पर एक सोच जिंदगी बदल देती है

यही से प्रारंभ होती हैं एक सोचअमरेशपरसियन की  १९७२ में प्रतापगढ़ –उत्तर प्रदेश के एक गाँव से अपनी प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद अपनी माध्यमिक और उच्च शिक्षा लेने के लिए रायबरेली का रुख किया, क्यों किपिता जी सरकारी कर्मचारी थे और रायबरेली में पोस्टिंग थी,जिससे की आगे पढ़ाई आसान हो गयी और कॉमर्स में स्नातक की उपाधि ली, फिर एक सोच कुछ नया करने की पलने लगी और निकल पड़े अपनी व्यावसायिक शिक्षा ( Professional Qualification) के लिए प्रयागराज ( कल का इलाहाबाद) जहाँ NIIT से कंप्यूटर की शिक्षा प्राप्त की और जीवन यापन का हुनर भी सीखा,कौशल को निखारने के लिए IIMMपुणे से प्रबंधन में भी अपने आप को आजमाया|

चूँकि पिता जी और बाबा जी दोनों एक सरकारी कर्मचारी थे पढ़ा लिखा परिवार, खेत खलिहान गाय भैंस बैल सभी के बीच पालन पोषण हुआ था, जिसकी वजह से कभी किसी अभाव का सामना नही करना पड़ा और एक व्यवस्थित सामाजिक जीवन जीने की शैली को सम्हाले रखने की जिम्मेदारी का पूरा एहसास था |

जीवन की आपाधापी प्रारंभ हो चुकी थी, इसी आपाधापी में दिल्ली पहुँचा और जीवन यापन के लिए कुछ विदेशी और देशी कंपनियो के लिए अपनीसेवा देना आरंभ कर दिया, फिर शहर दर शहर, देश दर देश,कार्य करने के बाद फिर से अपने देश आकर बसे और कुछ हट करमन की करने की सोच को जिन्दा रखने में कामयाब रहा, इसी सिलसिले को लेकर आगे बढ़ा और बरसों से अपने दिल में पली हुई इच्छा को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया प्रारंभ किया|

बचपन से ही तमन्ना थी कलाकार और कलमकार के रूप में काम करने की सो मुंबई में बसा और पहलीweb series में काम करने का मौका मिला, जिसमेबहोत जाने माने कलाकार हस्तियो के साथ काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, फिर एक फिल्म शूटिंग करने का मौका मिला जिसमे, कुछ और दिग्गज कलाकारों का आशीर्वाद मिला, लेकिनअभी भी कभी कुछ लिखने की ललक हिलोरे मार रही थी, जो २०२० के कोरोनाकाल के lockdownमें Professional रूप सेप्रारंभ हो गया|

मेरी पैत्रिक और प्रारंभिक भूमि आदरणीय श्री हरिवंश राय बच्चन जी, आदरणीय मलिकमोहम्मदजायशी जी और आदरणीय आचार्य महाबीर प्रसाद द्विवेदी जी की हैं और इनको पढ़ सुन कर ही बड़ा हुआ तो कुछ न कुछ तो पहले से ही मुझमे ललक के रूप में समाहित हो चुका था, अब उस पड़ाव का इन्तजार था जब इन विभूतियों के चरणों की धूल को प्रणाम करते हुए एक लघु कोशिश की जाए|

LOCKDOWN में समय का बेहतरीन सदुपयोग करते हुए लेखन का कार्य प्रारंभ कर दिया, इसी बीच कुछ ऐसे संघर्षशील परिस्थिया बनती रही और मेंरीकवितायें अपना स्वरुप लेती रही हैं, जैसे २०२० के दो तूफ़ान (अम्फान और निसर्ग) और दो मेरे मन पसंद कलाकार (इरफ़ान खान सर और श्री शुशांत सिंह राजपूत जी) की आकस्मिक मृत्यु ने मुझे झकझोर दिया, मैंने उनको अपनी कविता में समाहित किया और श्रधांजलि देने के की कोशिश की|