Jharokhe Se Jhalak झरोखे से झलक

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Jharokhe Se Jhalak झरोखे से झलक

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प्रस्‍तुत संकलन की 13 कहानियों के माध्‍यम से लेखक ने अतीत के झरोखे से उस कालखंड की झलक निहारने का प्रयास किया है जो उसने अपने छोटे से पैतृक गाँव से लेकर प्रादेशिक राजधानी तक देखा, जिया, भोगा तथा अनुभव किया। ये कहानियाँ मूलतः सन 1990 से 2000 के कालखंड में लिखी गई थीं।

इस झरोखे से झलकती है अनेक कुप्रवृत्त‍ियों एवं बदलते वक्‍त के साथ संकीर्ण होती सोच और जीवन को एक अलग ढंग से जीने की कोशिश।

प्रस्‍तुत संग्रह में संकलित ‘दीवारें नहीं टूटीं’  तथा ‘अछूत का बधाई-पत्र’ कहानियों में छुआछूत की सामाजिक बुराई को सामने लाने का प्रयास किया गया है। जबकि ‘भूल’, ‘फिर अकेला’ एवं ‘परिचय’ कहानियों में छुआछूत की दीवारें फाँद कर मुक्‍त वातावरण में जीने और अंतर्जातीय प्रेम-संबंधों के प्रति नई पीढ़ी की सुगबुगाहट दिखाई देती है।

‘वितृष्‍णा’ के कथानक में दहेज का दंश झेल रहे युवक की मानसिक स्थिति का चित्रण है, जबकि ‘भँवर’ कहानी पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र से जुड़े लोगों की समस्याओं पर आधारित सत्यानुभवों के प्रकाश में लिखी गई है।

गाँव के मुक्‍त वातावारण में पला-बढ़ा युवक जब सरकरी नौकरी में जर्जर सरकारी तंत्र की कुचालों का शिकार होता है तो वह वापस अपने गाँव की राह पकड़ता है। ‘स्‍वप्‍नभंग’ कहानी की विषय-वस्तु ऐसी ही है।

‘फोन की घंटी’ कहानी आधुनिक संचार माध्यमों और शिक्षा के प्रसार के कारण सामाजिक मान्यताओं में उत्‍पन्‍न हुए विक्षोभ का चित्रण करती है। इसी प्रकार ‘मृगतृष्‍णा’ युवा पीढ़ी में पनप रही भटकाव की प्रवृत्ति पर आधारित मनोविश्लेषणात्मक कहानी है। ‘प्रतिदान’ में कुंठित एवं विवश नारी ने साहस का दामन थाम कर शोषक तत्त्वों से बदला लेना सीख लिया है।

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Description

प्रस्‍तुत संकलन की 13 कहानियों के माध्‍यम से लेखक ने अतीत के झरोखे से उस कालखंड की झलक निहारने का प्रयास किया है जो उसने अपने छोटे से पैतृक गाँव से लेकर प्रादेशिक राजधानी तक देखा, जिया, भोगा तथा अनुभव किया। ये कहानियाँ मूलतः सन 1990 से 2000 के कालखंड में लिखी गई थीं।

इस झरोखे से झलकती है अनेक कुप्रवृत्त‍ियों एवं बदलते वक्‍त के साथ संकीर्ण होती सोच और जीवन को एक अलग ढंग से जीने की कोशिश।

प्रस्‍तुत संग्रह में संकलित ‘दीवारें नहीं टूटीं’  तथा ‘अछूत का बधाई-पत्र’ कहानियों में छुआछूत की सामाजिक बुराई को सामने लाने का प्रयास किया गया है। जबकि ‘भूल’, ‘फिर अकेला’ एवं ‘परिचय’ कहानियों में छुआछूत की दीवारें फाँद कर मुक्‍त वातावरण में जीने और अंतर्जातीय प्रेम-संबंधों के प्रति नई पीढ़ी की सुगबुगाहट दिखाई देती है।

‘वितृष्‍णा’ के कथानक में दहेज का दंश झेल रहे युवक की मानसिक स्थिति का चित्रण है, जबकि ‘भँवर’ कहानी पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र से जुड़े लोगों की समस्याओं पर आधारित सत्यानुभवों के प्रकाश में लिखी गई है।

गाँव के मुक्‍त वातावारण में पला-बढ़ा युवक जब सरकरी नौकरी में जर्जर सरकारी तंत्र की कुचालों का शिकार होता है तो वह वापस अपने गाँव की राह पकड़ता है। ‘स्‍वप्‍नभंग’ कहानी की विषय-वस्तु ऐसी ही है।

‘फोन की घंटी’ कहानी आधुनिक संचार माध्यमों और शिक्षा के प्रसार के कारण सामाजिक मान्यताओं में उत्‍पन्‍न हुए विक्षोभ का चित्रण करती है। इसी प्रकार ‘मृगतृष्‍णा’ युवा पीढ़ी में पनप रही भटकाव की प्रवृत्ति पर आधारित मनोविश्लेषणात्मक कहानी है। ‘प्रतिदान’ में कुंठित एवं विवश नारी ने साहस का दामन थाम कर शोषक तत्त्वों से बदला लेना सीख लिया है।

Additional information

Weight 399 g
Dimensions 18 × 2 × 9 cm
Author Name

Devender Kumar Sharma

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